दूसरे मुगल बादशाहों से अलग अकबर अक्सर लंबे समय तक सात्विक खाना खाता था, जिसे वह सुफियाना भोजन कहता था, जिसमें केवल अन्न और सब्जियों का इस्तेमाल होता था. यहां तक प्याज, लहसुन, ज्यादा मसालों और घी-तेल से भी इसमें परहेज किया जाता था. बेशक अकबर मांसाहारी था लेकिन लंबे लंबे समय के लिए वह इसे छोड़ देता था.
अकबर के बारे में कहा जाता है कि वह ऐसा मुगल बादशाह था, जो शाकाहारी ज्यादा था और मांसाहारी कम. उसने शाकाहार से मिला जुला एक खाना विकसित किया, जिसे वह सुफियाना भोजन कहता था. उन्हें वह सयंम के दिनों में खाता था. वैसे अकबर की शाही रसोई में तीन तरह के भोजन बनाए जाते थे. इन्हें पकाने और बनाने का तरीका भी अलग ही था. इसे अकबर के रसोई विभाग ने अपने तरीके से विकसित किया था.
सलमा हुसैन की किताब “द एम्परर्स टेबल – द आर्ट ऑफ मुगल कुजीन” इस बारे में विस्तार से बताती है. आइन-ए-अकबरी में भीपके हुए व्यंजनों की तीन श्रेणियों के बारे में बताया गया है.सूफियाना भोजन वो खाना होता था जो अकबर के संयम के दिनों में खाता था, इसमें मांस का उपयोग नहीं होता था. ये व्यंजन चावल, गेहूं, दाल, पालक और कुछ अन्य पत्तेदार सब्जियों के साथ शरबत आदि से बनते थे.
