किसान मजदूर सेवा संस्थान के बैनर तले ग्रामीणों ने मंगलवार को इन आरोपों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग ।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गंगौली चौराहे के गाटा संख्या 1572 (19 विस्वा 5 धूर) को चकबंदी के दौरान रिकॉर्ड से गायब कर दिया गया। इसकी जगह तीन नए गाटे 2289, 2290 और 2291 बना दिए गए।
इसके अतिरिक्त, शिव प्रताप यादव की पत्नी के नाम दर्ज गाटा संख्या 2288 का रकबा 220 एयर से बढ़ाकर 370 एयर कर दिया गया। आरोप है कि तालाब को पाटकर उस पर निर्माण भी करा लिया गया है। गंगौली चौराहे के ही गाटा संख्या 2284 (बंजर भूमि) पर चार मकानों की नींव डाल दी गई है। मौके पर लेखपाल ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि यह निर्माण प्रधान के पति बब्लू द्वारा करवाया जा रहा है।
मटेरा गांव में गाटा संख्या 967 पर स्थित तालाब, बागवानी क्षेत्र और अंत्येष्टि स्थल की लगभग दो बीघा जमीन पर भी कब्जे का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक रास्ता भी तोड़कर बंद कर दिया गया है।किसान मजदूर सेवा संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष राज कुमार पाण्डेय ने बताया कि यह मामला पूरी तरह से शिव प्रताप यादव से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव में जितनी भी रिजर्व लेन और तालाब की जमीनें थीं, उन सभी पर कब्जा कर लिया गया है। पाण्डेय ने कहा कि 18 दिनों से शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन कुछ अधिकारी कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि कुछ जानबूझकर मामले को टाल रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जगह खाली करने के लिए पैसे की मांग की जाती है।
पाण्डेय ने जानकारी दी कि जून में तालाब की जमीन खाली कराने का आदेश जारी हो चुका है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 10 दिसंबर तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो 2,000 लोग मिलकर जिलाधिकारी कार्यालय का घेरा वकरेंगे।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से राजस्व विभाग के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।
रिपोर्ट : शैलेन्द्र प्रताप सिंह (अमेठी)
