हिंदुओं की कोई सुनने वाला नहीं, जिंदा रहने का मतलब है चुप्पी… बांग्लादेश में जंगलराज, अवामी लीग ने बताया सच

ढाका: बांग्लादेश के आंतरिक हालात को लेकर शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग ने अपनी चिंता जाहिर की है. उन्होंने ‘बांग्लादेश ह्युमन राइट्स क्राइसिस: वॉयसेस साइलेंस्ड, फ्रीडम्स क्रश्ड, फियर एवरीवेयर’ शीर्षक वाली एक रिपोर्ट का हवाला देकर कहा है कि पत्रकारों, लेखकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न, मनमानी गिरफ्तारियां और उन्हें जबरन अगवा करना, पूरे बांग्लादेश में काफी बड़े स्तर पर हो रहा है. रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है- अगस्त 2024 और जुलाई 2025 के बीच, 496 पत्रकारों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, जबकि तीन पत्रकारों ने अपनी ड्यूटी के दौरान जान गंवा दी.बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के अपदस्थ होने के बाद देश भर में पत्रकारों पर हुए अत्याचारों पर प्रकाश डालते हुए पार्टी ने कहा कि दमन ने एक और भी गंभीर मोड़ ले लिया है. अब पत्रकारों और लेखकों को झूठे हत्या और हमले के आरोपों में अदालतों में घसीटा जा रहा है, जबकि वे उन घटनाओं से जुड़े भी नहीं हैं. रिपोर्ट के मुताबिक ढाका, सिलहट, चटगांव और दर्जनों अन्य जिलों में अनुभवी और स्थानीय पत्रकारों को मनगढ़ंत मामलों में फंसाया गया है.हिंदुओं का कोई सहारा नहींपार्टी ने रिपोर्ट में 2025 की पहली छमाही में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ 258 सांप्रदायिक हमलों का जिक्र किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि रंगपुर जिले में, हिंदू परिवार असहाय होकर देखते रहे जब उनके घरों को उन्मादी हमलावरों ने आग लगा दी, लूट लिया और ध्वस्त कर दिया. ये हमले कोई छिटपुट घटनाएं नहीं थीं बल्कि धमकी के एक पैटर्न का हिस्सा थीं, जो एक स्पष्ट संदेश है कि देश में अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है. जिन पीड़ितों ने विरोध करने की हिम्मत की, उन्हें पीटा गया जबकि अन्य डरकर भाग गए और अपनी ही मातृभूमि में विस्थापन के लिए मजबूर हो गए.

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