अमेरिका और फ्रांस के बीच रिश्तों में अचानक आई तल्खी ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. फ्रांस ने अमेरिका के राजदूत चार्ल्स कुशनर को तलब किया है और उनसे तीखा विरोध जताया है. दरअसल, चार्ल्स कुशनर ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को एक चिट्ठी लिखी थी और आरोप लगाया कि पेरिस यहूदी-विरोधी हिंसा को रोकने में नाकाम रहा है. यह खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि चार्ल्स कुशनर डोनाल्ड ट्रंप के समधी हैं और ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप की शादी चार्ल्स कुशनर के बेटे से हुई है.चार्ल्स कुशनर ने न सिर्फ मैक्रों को चिट्ठी लिखी, बल्कि उसे वॉल स्ट्रीट जर्नल में ओपन लेटर के तौर पर पब्लिश भी करवा दिया. उन्होंने कहा कि फ्रांस इजरायल की आलोचना कर और फिलिस्तीन को मान्यता देने की कोशिश कर कट्टरपंथियों को हवा दे रहा है. कुशनर ने लिखा, आज की दुनिया में एंटी-जायनिज्म ही एंटी-सेमिटिज्म है.विदेश मंत्रालय बचाव में उतराफ्रांस ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया और कड़ा जवाब दिया. फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने कहा, ये आरोप पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं. फ्रांस यहूदी-विरोधी विचारधारा के खिलाफ हमेशा प्रतिबद्ध रहा है. मंत्रालय ने यह भी कहा कि राजदूत का बयान अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और किसी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने जैसा है. मामला यहीं नहीं थमा. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने उलटे कुशनर का बचाव किया और कहा कि वे राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने का शानदार काम कर रहे हैं. इस बयान ने संकेत दिया कि ट्रंप प्रशासन फ्रांस की नाराजगी के बावजूद अपने राजदूत के साथ खड़ा है.कुशनर का विवादों से पुराना नाताचार्ल्स कुशनर पहले भी विवादों में रह चुके हैं. 2005 में उन्हें टैक्स चोरी, गवाहों को प्रभावित करने और धोखाधड़ी के आरोप में दो साल जेल की सजा हुई थी. बाद में ट्रंप ने उन्हें राष्ट्रपति रहते माफी दी. अब वे सिर्फ एक महीने पहले ही पेरिस में अमेरिकी राजदूत बने हैं और पहले ही बड़े कूटनीतिक विवाद का कारण बन गए हैं.इजरायल-फिलिस्तीन पर फ्रांस की नीतिफ्रांस और कुछ यूरोपीय देश हाल के हफ्तों में फ़िलिस्तीन को एक स्वतंत्र राज्य के तौर पर मान्यता देने की दिशा में बढ़े हैं. हालांकि, उन्होंने इजरायल के साथ व्यापारिक और सुरक्षा संबंध बनाए रखने की बात भी दोहराई. लेकिन इस कदम ने इजरायल और अमेरिका दोनों को नाराज किया है. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी हाल में मैक्रों को एक चिट्ठी लिखकर आरोप लगाया कि फ्रांस की नीति यहूदी-विरोध को बढ़ावा देती है. इस पर मैक्रों के दफ्तर ने करारा पलटवार करते हुए इसे घृणित और गलत आरोप बताया.
