कश्मीर की मूल आबादी इस्लाम के आगमन से पहले मुख्यतः हिंदू थी, जिसमें ब्राह्मणों का एक बड़ा वर्ग था जिन्हें ‘पंडित’ कहा जाता था. कश्मीरी पंडित, कश्मीर घाटी के पंच गौड़ ब्राह्मण समूह से संबंधित थे. उच्च शिक्षा, विद्वत्ता और प्रशासनिक कार्यों में आमे माने जाते थे.आखिर ये पूरी की पूरी आबादी कैसे मुस्लिम धर्म में बदल गई. क्यों अब भी इस मुस्लिम आबादी के ज्यादातर लोग खुद को मुस्लिम पंडित बताते हैं. उसी तरह सरनेम भी लगाते हैं.मध्यकाल में मुस्लिम शासन के दौरान, विशेषकर 14वीं सदी में सुल्तान सिकंदर बुतशिकन के समय,बड़े पैमाने पर हिंदुओं पर धर्म परिवर्तन या पलायन का दबाव पड़ा. बहुत से ब्राह्मणों ने इस्लाम स्वीकार कर लिया. हालांकि अपनी सामाजिक पहचान-जैसे ‘पंडित’, ‘भट’, ‘लोन’, ‘गनी’ आदि उपनाम-जारी रखे. यह उपनाम उनकी विद्वता, सामाजिक स्थिति और कश्मीरी मूल की पहचान से जुड़ा था, जिसे उन्होंने इस्लाम कबूल करने के बाद भी बनाए रखा.कश्मीर में आज भी ऐसे मुस्लिम समुदाय हैं, जो अपने नाम के साथ ‘पंडित’ या अन्य पारंपरिक ब्राह्मण उपनाम लगाते हैं. इन्हें ‘मुस्लिम पंडित’ या ‘पंडित शेख’ भी कहा जाता है. ये लोग कभी हिंदू ब्राह्मण थे, जिन्होंने ऐतिहासिक परिस्थितियों में इस्लाम स्वीकार किया, लेकिन अपनी जातिगत और सामाजिक पहचान को बनाए रखा. इन उपनामों का इस्तेमाल सम्मान और कश्मीर की मूल संस्कृति से जुड़ाव के प्रतीक के रूप में भी होता है.
