Medha Patkar News: कुछ भी बोलने से पहले 4 बार सोच लें… नहीं तो पाटेकर की तरह हो जाएंगे अरेस्ट?

नई दिल्ली. बिना सोचे समझे कुछ भी बोलना कितना महंगा पड़ सकता है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण आज की तारीख में नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटेकर हैं.भले ही दिल्ली पुलिस ने कोर्ट के गैर-जमानती वारंट पर उन्हें शुक्रवार को गिरफ्तार किया हो, लेकिन यह मामला आज का नहीं बल्कि 24 साल पुराना है.जब मेधा पाटेकर ने बिना सोचे समझे विनय कुमार सक्सेना पर आरोप लगाए थे।साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने कहा था कि मेधा पाटेकर अदालत में उपस्थित नहीं हुईं और उन्होंने जानबूझकर सजा से जुड़े आदेश का पालन नहीं किया.पाटेकर की मंशा स्पष्ट रूप से अदालत के आदेश की अवहेलना करने और सुनवाई से बचने की थी.चूंकि सजा पर कोई स्थगन आदेश मौजूद नहीं है, इसलिए कोर्ट ने कहा कि पाटेकर को पेश कराने के लिए अब दबाव का सहारा लेना अनिवार्य हो गया है.अगली तारीख के लिए दोषी मेधा पाटेकर के खिलाफ दिल्ली पुलिस आयुक्त के कार्यालय के माध्यम से गैर-जमानती वारंट जारी किया जाए.इस मामले पर अगली सुनवाई तीन मई को होगी.आखिर पाटेकर ने क्या कहा था…यह मामला 2000 में शुरू हुआ, जब वी.के. सक्सेना जो उस समय अहमदाबाद स्थित एनजीओ ‘नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज’ के अध्यक्ष थे.उस वक्त मेधा पाटेकर और उनके ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ के खिलाफ एक विज्ञापन प्रकाशित किया.इसके जवाब में, पाटेकर ने एक प्रेस रिलीज जारी की, जिसमें उन्होंने सक्सेना के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं.इस पर सक्सेना ने उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया.सक्सेना ने कहा था कि मेधा पाटेकर ने 25 नवंबर 2000 को जारी एक प्रेस नोट में उन्हें कायर व देश विरोधी होने और उन पर हवाला लेनदेन में शामिल होने का आरोप लगाया था।कोर्ट ने दिया था क्या फैसलाइस मामले में 24 मई 2024 को दिल्ली की साकेत कोर्ट ने पाटेकर को आपराधिक मानहानि का दोषी ठहराया और उन्हें पांच महीने की साधारण कैद और ₹10 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया.हालांकि 8 अप्रैल 2025 को, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने उनकी सजा को एक साल की प्रोबेशन अवधि में बदल दिया, जिसमें उनकी अच्छे आचरण की निगरानी की जाएगी।फिर क्यों हुई गिरफ्तारी?हाल ही में, अदालत ने पाया कि पाटेकर ने प्रोबेशन बॉन्ड और जुर्माना जमा नहीं किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उन्होंने अदालत के आदेशों का पालन नहीं किया.इसलिए, अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किया, जिसके आधार पर दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया.

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