ऑपरेशन ब्लू स्टार के टाइम यू-टर्न ना लेतीं तो जिंदा रहतीं इंदिरा गांधी? सेना चीफ वाला फैसला कैसे बना नासूर!

भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल S K सिन्हा के बेटे और खुद केंद्रीय मंत्री का पदभार संभाल चुके यशवर्धन सिन्हा ने साल 1984 और ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौर का अहम डिटेल शेयर किया है. लेफ्टिनेंट जनरल सिन्हा ने सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण से जुड़ी कई अहम पहलों की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. आखिर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सिन्हा को सेना प्रमुख क्यों नहीं बनाया? और साथ ही ये फैसला नहीं लेने की स्थिति में इंदिरा गांधी जिंदा रह सकती थीं. आइए समझते हैं पूरा मामला.

भारत के सैन्य इतिहास में कुछ फैसले ऐसे भी हुए हैं, जिनकी गूंज कई साल गुजरने के बाद भी सुनाई देती है. ऐसा ही एक फैसला 1983 में लिया गया, जब लेफ्टिनेंट जनरल श्रीनिवास कुमार सिन्हा (एस.के. सिन्हा) को अंतिम क्षणों में आर्मी के मुखिया के पद से बाहर कर दिया गया. उन्हें व्यापक तौर पर अगला थलसेनाध्यक्ष माना जा रहा था. उस समय सेना में उनके चयन को लेकर लगभग पूरी सहमति थी. तत्कालीन थलसेनाध्यक्ष ने सार्वजनिक रूप से उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था. लेकिन जैसे-जैसे पंजाब संकट गहराता गया, इस बात की निश्चितता भी टूटती चली गई. सेना प्रमुख के वी कृष्ण राव की जगह एस के सिन्हा की बजाए अरुण श्रीधर वैद्य को थल सेना अध्यक्ष बना दिया गया.

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