आशा पारेख-धर्मेंद्र ने 1960-70 के दशक में दोनों ने कई सुपरहिट फिल्में दीं, जिनमें ‘आए दिन बहार के’ (1966), ‘शिकार’ (1968), ‘मेरा गांव मेरा देश’ (1971) और ‘समाधि’ (1972) शामिल हैं. रोमांस, ड्रामा और संगीत के संतुलन ने इस जोड़ी को उस दौर की सबसे पॉपुलर जोड़ी में से एक बना दिया.
आशा पारेख हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में एक ऐसी एक्ट्रेस, जिनकी मुस्कान और अदाओं के साथ-साथ उनकी ऑन-स्क्रीन जोड़ी भी दर्शकों के दिलों पर राज करती थी. परदे पर उनके साथ खड़े थे बॉलीवुड के ही-मैन, जिनके साथ उन्होंने कई यादगार फिल्में दीं और इंडस्ट्री की सबसे सफल जोड़ियों में अपनी जगह बनाई. लेकिन वक्त के साथ जब साथी एक-एक कर दुनिया से रूख़सत होने लगे, तो दिल में बस गई खाली जगह अब उनके शब्दों में दर्द बनकर सामने आई. धर्मेंद्र के निधन के बाद उन्होंने भावुक होकर कहा, ‘सब मुझे छोड़कर चले गए… अब धर्म जी भी नहीं रहे.’ कभी जिनके साथ हंसी-मजाक, शूटिंग की मस्ती और सुपरहिट फिल्मों की चमक साझा की, आज उन्हीं यादों में अकेलापन महसूस होता है. उनके लिए यह सिर्फ एक को-स्टार का जाना नहीं, बल्कि एक पूरे दौर का खत्म होना है.
