CJI रहते नेपाल की अंतरिम पीएम सुशीला कार्की के वो चर्चित फैसले, जिनकी वजह से उन्हें मिलीं सुर्खियां

Sushila Karki: काठमांडू अपने अशांत राजनीतिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत करने की तैयारी कर रहा है. भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के मुद्दे पर हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच केपी ओली के नेपाल के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. उसके कुछ दिनों बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने शुक्रवार को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली. एक प्रतिष्ठित न्यायविद और लेखिका कार्की को भ्रष्टाचार पर अपने कड़े रुख के कारण प्रमुख ‘वी नेपाली ग्रुप’ सहित अधिकांश जेनरेशन जेड समूहों का भरपूर समर्थन प्राप्त हुआ. नेपाल का ताजा आंदोलन भ्रष्टाचार और डिजिटल स्वतंत्रता पर प्रतिबंधों के प्रति असंतोष से प्रेरित था. जिसने नेपाल भर में हजारों युवाओं को लामबंद कर दिया. 5,000 से ज्यादा सदस्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक में सुशीला कार्की की नियुक्ति का बहुमत से निर्णय लिया गया.कार्की कोई पेशेवर राजनीतिज्ञ नहीं हैं, लेकिन उन्हें जुलाई 2016 से जून 2017 तक नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनके कार्यकाल के लिए याद किया जाता है. भ्रष्टाचार के प्रति अपनी जीरो टॉलरेंस के लिए जानी जाने वाली कार्की ने न्यायाधीश के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान सम्मान और तीखा विरोध दोनों अर्जित किया. उनकी स्वच्छ प्रतिष्ठा ने उन्हें राजनीतिक सुर्खियों में ला दिया. क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने उनसे अंतरिम प्रशासन का नेतृत्व करने की मांग की थी. उनकी पदोन्नति की तुलना नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस से की जा रही है, जिन्हें पिछले साल शेख हसीना को सत्ता से बेदखल करने वाले छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए आमंत्रित किया गया था.

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