Former King Gyanendra Shah: नेपाल पिछले कुछ सालों में अपनी सबसे खराब राजनीतिक अशांति का सामना कर रहा है. देश भर में छात्रों के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. सोशल मीडिया पर सरकारी प्रतिबंध का विरोध कर रहे और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा बलों के साथ झड़प हुई. इस संघर्ष में कम से कम 19 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए. प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा सहित शीर्ष राजनीतिक नेताओं के घरों में आग लगा दी. संसद और सुप्रीम कोर्ट की इमारतों को भी आग के हवाले कर दिया. बढ़ती हिंसा और दबाव के बीच प्रधानमंत्री खड्ग प्रसाद ओली ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया. अनिश्चितकालीन कर्फ्यू के बावजूद काठमांडू और अन्य शहरों में ‘सरकार में बैठे हत्यारों को सजा दो. बच्चों की हत्या बंद करो’ जैसे नारों के साथ विरोध प्रदर्शन जारी रहे. पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने जारी किया बयानपूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह ने मंगलवार को एक सार्वजनिक बयान जारी किया. हालांकि ज्ञानेंद्र शाह 2008 में राजशाही के खात्मे के बाद से ज्यादातर समय राजनीति से दूर रहे हैं. उन्होंने मौतों पर दुख जताया और प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने का आग्रह किया. बयान में कहा गया, “यह बेहद दुखद और निंदनीय है कि युवा पीढ़ी की जायज मांगों पर ध्यान देने के बजाय जानें चली गईं और कई लोग घायल हो गए. मैं इस हिंसा की निंदा करता हूं, जो शांतिपूर्ण नेपाली समाज के आदर्शों के विरुद्ध है.” ज्ञानेंद्र ने भी प्रदर्शनकारियों की सुशासन और आर्थिक अनुशासन की मांगों को वैध माना.
