bjp ka Bihar band kitna safal raha: बिहार चुनाव से ठीक पहले बीजेपी ने गुरुवार को पीएम मोदी के ‘मां की गाली’ को मुद्दा बनाकर एक दिन का बिहार बंद रखा. बिहार बंद को सफल बनाने के लिए बीजेपी के सभी बड़े नेता, केंद्रीय मंत्रियों से लेकर बिहार सरकार के कई मंत्री और विधायक तक सड़कों पर उतरे और विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया. यह बंद न केवल राज्य में जनजीवन को प्रभावित करने में सफल रहा, बल्कि इसने बीजेपी को आगामी बिहार चुनाव के लिए एक नया और भावनात्मक नैरेटिव सेट करने का मौका भी दिया है. ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या बीजेपी राज्य की जनता और विपक्षी पार्टियों को जो मैसेज देना चाहती थी,वह उन तक पहुंच गई? क्या बीजेपी का एक दिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के 16 दिन के ‘वोटर अधिकार यात्रा’ पर भारी पड़ा?बिहार की राजनीति में गुरुवार यानी 4 सितंबर एक नया अध्याय जुड़ गया है, जब सत्ता पक्ष ने एक दिन का बिहार बंद बुलाया हो. वह भी पीएम मोदी के मां के बहाने पूरे देश की माताओं के सम्मान में. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में भारतीय जनता पार्टी का आह्वान कितना कारगर रहा है, यह तो बिहार चुनाव के नतीजे बताएंगे. लेकिन गुरुवार को स्कूल-कॉलेज और सरकारी दफ्तरों में कामकाज न के बराबर ही हुआ. इस बंद का व्यापक असर देखने को मिला.
