नैनीताल: उत्तराखंड एक तरफ जहां अपनी शांत वादियों, बर्फीली चोटियों और तीर्थ स्थलों के लिए प्रसिद्ध है, वहीं दूसरी तरफ यह राज्य बार-बार प्रकृति के भीषण प्रकोप का शिकार भी बनता रहा है. ताजा उदाहरण उत्तरकाशी जिले के धराली गांव का है, जहां मंगलवार को खीर गंगा में आई भीषण बाढ़ में कई लोग लापता हैं और कुछ की मौत हो चुकी है. गंगोत्री तीर्थ मार्ग पर बसे इस छोटे से गांव में पानी ने घर, होटल और होमस्टे तक बहा दिए. पहाड़ दरकने से खीरगंगा में भारी सैलाब आ गया. यह घटना फिर एक बार हमें उत्तराखंड की उन त्रासदियों की याद दिला गई है, जिनमें सैकड़ों लोगों ने अपनी जान गंवाई और हजारों परिवार उजड़ गए. आइए जानते हैं उत्तराखंड की बड़ी आपदाएं जो इतिहास के काले पन्नों में दर्ज हैंनैनीताल भूस्खलन –188018 सितंबर 1880 को नैनीताल शहर में हुई मूसलधार बारिश के बाद मल्लीताल क्षेत्र में भीषण भूस्खलन हुआ. मलबे में दबकर 151 लोगों की जान चली गई, जिनमें 108 भारतीय और 43 ब्रिटिश नागरिक शामिल थे. इस त्रासदी ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. भूस्खलन के बाद जो मलबा जमा हुआ, उसी से आज का फ्लैट्स मैदान बना. साथ ही, नैनादेवी मंदिर भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था. भूकंप –199120 अक्टूबर 1991 को उत्तरकाशी जिला 6.8 तीव्रता के भूकंप से कांप उठा. यह भूकंप इतना विनाशकारी था कि 768 लोगों की मौत हो गई और हजारों घर पूरी तरह ढह गए. सैकड़ों परिवार बेघर हो गए. रात में आए इस भूकंप ने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया. आज भी वहां के बुजुर्ग उस रात के भयानक मंजर को याद कर सिहर उठते हैं.मालपा आपदा, पिथौरागढ़ – 199818 अगस्त 1998 को पिथौरागढ़ के मालपा गांव में भारी चट्टानें दरकने से पूरा इलाका मलबे में दब गया था. इस भीषण त्रासदी में 225 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें 55 कैलाश मानसरोवर यात्री भी शामिल थे. मलबे ने शारदा नदी का बहाव रोक दिया, जिससे आस-पास के गांवों में बाढ़ आ गई और स्थिति और भयावह हो गई.चमोली भूकंप – 1999उत्तराखंड को एक और बड़ा झटका 1999 में चमोली जिले में लगे 6.8 तीव्रता के भूकंप से लगा. इसमें 100 लोगों की जान चली गई और बड़ी संख्या में इमारतें व सड़कों को नुकसान पहुंचा. रुद्रप्रयाग और चमोली के कई गांवों में नदियों का रुख बदल गया और बाढ़ जैसे हालात बन गए. ये भूकंप वर्षों तक उत्तराखंड की विकास योजनाओं को पीछे धकेल गया.केदारनाथ आपदा – 201316-17 जून 2013 को हुई इस त्रासदी को ‘हिमालयी सुनामी’ कहा गया. बादल फटने और ग्लेशियर टूटने से मंदाकिनी नदी में अचानक आई बाढ़ ने केदारनाथ समेत पूरे रुद्रप्रयाग जिले को तबाह कर दिया. 5,000 से अधिक लोग मारे गए और हजारों आज तक लापता हैं. लाशें महीनों बाद मलबे से निकलीं. यह उत्तराखंड की सबसे भीषण और दर्दनाक आपदा मानी जाती है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया
