उत्तराखंड में उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में बादल फटने से भारी तबाही हुई है. इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 4 लोगों के मरने की खबर है. अचानक बादल फटने से खीर गंगा नदी में पानी का जल स्तर इतना बढ़ा कि उसने तबाही मचा दी. इसके मलबे में यहां का प्रसिद्ध कल्प केदार मंदिर दब गया. इस मंदिर में केदारनाथ धाम की झलक मिलती है. अपदा से पहले यहां हर समय खीर गंगा भगवान शिव का जलाभिषेक करती थीं.केदारनाथ धाम जैसा कल्प केदार मंदिरधराली के कल्प केदार मंदिर की बनावट केदारनाथ धाम मंदिर के जैसे ही है. इस मंदिर को कत्यूर शैली में बनाया गया है. यह प्राचीन वास्तुकला और समृद्ध इतिहास का प्रतीक है. बताया जाता है कि कल्प केदार मंदिर के गर्भगृह का शिवलिंग नंदी की पीठ के आकार का है. यह शिवलिंग ठीक वैसे ही है, जैसे केदारनाथ मंदिर का शिवलिंग है. मंदिर के बाहर के पत्थरों पर नक्काशी की गई है, जो काफी आकर्षक है.हर समय खीर गंगा करतीं जलाभिषेकबताया जाता है कि कल्प केदार मंदिर जमीन की सतह से नीचे है. भगवान कल्प केदार की पूजा के लिए भक्तों को नीचे जाना पड़ता था. गर्भगृह में जो शिवलिंग स्थापित है, उस पर हर समय खीर गंगा का पानी गिरता रहता था, जैसे मानो कि खीर गंगा स्वयं भगवान शिव का जलाभिषेक कर रही हों. खीर गंगा के जल को आने के लिए एक मार्ग भी बनाया गया था.भगवान शिव का यह कल्प केदार मंदिर कई सालों तक जमीन के नीचे ही दबा था. हो सकता है कि पहले आई आपदाओं के मलबे में यह दबा गया हो. 1945 में यहां पर कई फीट नीचे खुदाई हुई तो यह प्रचीन शिव मंदिर मिला.मंदिर का आधा हिस्सा जमीन मेंजीमन की सतह से 12 फीट नीचे तक खुदाई की गई थी. इस मंदिर का आधा हिस्सा फिर भी जमीन में ही था. इस मंदिर में भगवान शिव की सफेद रंग की मूर्ति है, उनके आसपास नंदी, शेर, शिवलिंग आदि भी हैं. लोक मान्यताओं के अनुसार, यह एक पांडवकालीन शिव मंदिर है, जो कभी 240 मंदिरों के समूह में शामिल था. बाद में ये सभी प्राकृतिक आपदाओं की वजह से भौगोलिक बदलाव में लुप्त हो गए. कल्प केदार मंदिर के पास के अवशेष 17वीं सदी के बताए जाते हैं. कल्प केदार मंदिर पुरातत्व विभाग की सूची में शामिल है.कहां हैं कल्प केदार मंदिरकल्प केदार मंदिर धराली गांव में है, जो उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 75 किलोमीटर दूर गंगोत्री हाइवे पर बसा है. यह गंगोत्री से 20 किलोमीटर की दूरी पर है.
