महाराष्ट्र में अखिलेश यादव की पार्टी के नेता अबू आजमी ने औरंगजेब को न्यायप्रिय शासक बताया. यहां तक कहा कि उसने कई मंदिर बनवाए. हिन्दुओं की रक्षा की. इसके बाद जब बवाल मचा तो अखिलेश यादव अपने नेता को बचाने के लिए खुद कूद पड़े. लेकिन मशहूर इतिहासकार और इग्नू के प्रोफेसर कपिल कुमार ने औरंगजेब की एक-एक कलई खोलकर रख दी.इतिहासकार कपिल कुमार ने कहा, उस समय औरंगजेब ने जो किया, उसके बारे में आज बहस क्यों होती है? आज क्यों कुछ मुसलमान उसके सपोर्ट में खड़े हो जाते हैं? सच्चाई है कि आज कोई मुसलमान अपने बेटे का नाम औरंगजेब नहीं रखता. लेफ्ट हिस्टोरियन इरफान हबीब को कहना पड़ा कि मथुरा और वृंदावन में मंदिर तोड़े गए थे. इसका मतलब उस समय क्रूरता हुई. औरंगजेब ने धर्म के नाम पर जजिया कर लगाया था. संगीत तक को उसने बंद किया.जिसने अपने भाइयों का कत्ल कियाकपिल कुमार ने बताया, नॉर्वे की एक इतिहासकार ने लिखा है कि बड़े पैमाने पर औरंगजेब धर्म परिवर्तन नहीं करवाता था. सवाल बड़े पैमाने और छोटे पैमाने का नहीं है. सवाल है कि रोज उसके दफ्तर में जो कहा जाता था कि आज कितने लोगों का धर्मांतरण कराया गया है, वह क्या था? औरंगजेब अकेला बादशाह था जिसने अपने भाइयों का कत्ल किया, अपने अब्बाजान को बंद करके रखा. एक क्रूरता की झलक आती है. अबू आजमी को औरंगजेब ही क्यों याद आया? इन्हें राष्ट्रवादी मुस्लिम अज़ीमुल्ला खान और अशफाकुल्लाह खान का नाम याद क्यों नहीं आया?गज़वा ए हिंद की बात नहीं हो रहीइतिहासविद कपिल कुमार ने कहा, इतिहास से सीख लेनी चाहिए. उस जमाने की गलतियों को ना दोहराएं और विकास के लिए आगे बढ़ें. औरंगजेब की लड़ाई धर्म की लड़ाई नहीं थी. कामाख्या मंदिर तक पर हमला किया गया. दक्षिण को औरंगजेब नहीं जीत पाया इसलिए उसकी मौत वहां हुई थी. गज़वा ए हिंद का जो कांसेप्ट डेवलप हुआ था, वो हिंदुस्तान जीतने आ रहे थे. क्या आज भी गज़वा ए हिंद की बात नहीं हो रही है. बर्नी ये लिखता है कि सोमनाथ को लूटा गया और मूर्ति तोड़कर दिल्ली भेजी गई. आप मानिए वो क्रूर शासक था और हम उसके लिए जिम्मेदार नहीं है. बहादुरशाह जफर को क्यों याद नहीं करते?अखिलेश यादव ने बचाव क्यों कियाअबू आजमी के विधानसभा से निलंबन पर उन्होंने कहा, निलंबन विधानसभा के नियमों के अनुसार किया जाता है. लेकिन अखिलेश यादव ने कहा था कि एक दिन सच तो सामने आएगा ही. अखिलेश यादव से एक सवाल है कि जो कांग्रेस करती रही बजाय इसके की दो समुदायों को मिलाया जाए. मुसलमान को डराकर रखा जाता है. क्यों मुसलमान को वोट बैंक समझा जाता है? मैं तो खुश था कि कुछ मुस्लिम नेता सामने आए उन्होंने कहा कि हम तो औरंगजेब को याद नहीं करते.
