Chhatrapati Shivaji Maharaj Grand Memorial to be Built in Agra: महाराष्ट्र सरकार अब उत्तर प्रदेश के आगरा में छत्रपति शिवाजी महाराज का स्मारक बनाएगी. ये घोषणा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को आगरा में एक कार्यक्रम में की. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि देवेंद्र फडणवीस छत्रपति शिवाजी महाराज की 395वीं जयंती के अवसर पर एक समारोह को संबोधित कर रहे थे. देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “आगरा कोठी (जिसे आज मीना बाजार के नाम से जाना जाता है) में एक भव्य स्मारक बनाया जाएगा, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज को कैद रखा गया था. महाराष्ट्र सरकार इस जमीन का अधिग्रहण करेगी. वहां छत्रपति शिवाजी महाराज का एक शानदार स्मारक होगा. मैं खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस बारे में बात करूंगा.”शिवाजी महाराज का आगरा से जुड़ाव
साल 1674 में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखने वाले छत्रपति शिवाजी ने कई सालों तक औरंगजेब के मुगल साम्राज्य से संघर्ष किया था और मुगल सेना को धूल चटाई थी. छत्रपति शिवाजी महाराज का आगरा के किले और मराठा साम्राज्य के इतिहास में एक विशेष महत्व है. शिवाजी महाराज ने मुगलों की अधीनता स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, जिसकी वजह से उन्हें लंबे समय तक उनसे भिड़ना पड़ा था. साल 1666 में मुगल बादशाह औरंगजेब ने मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज को अपने 50वें जन्मदिन समारोह में शामिल होने के लिए आगरा के शाही दरबार में न्योता दिया था.शिवाजी के पराक्रम से परेशान थे मुगल
छत्रपति शिवाजी महाराज अपने बेटे राजकुमार संभाजी के साथ 12 मई, 1666 को जन्मदिन समारोह में शिरकत करने के लिए आगरा पहुंचे थे. मुगल बादशाह औरंगबेज शिवाजी महाराज के पराक्रम से परेशान था, इसीलिए उसने उनसे संधि करने की योजना बनाई थी. लेकिन औरंगबेज से उचित सम्मान न मिलने पर शिवाजी ने मनसबदार का पद ठुकरा दिया था. शिवाजी महाराज ने भरे दरबार में अपनी नाराजगी जाहिर की थी और औरंगजेब पर विश्वासघात का आरोप लगाया. लेकिन औरंगजेब के सैनिकों ने छल से शिवाजी महाराज और उनके बेटे संभाजी को बंदी बना लिया था.
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फिदाई हुसैन की हवेली में रहे नजरबंद
एक शोध में दावा किया गया है कि औरंगजेब ने 12 मई, 1666 को शिवाजी महाराज को राजा जयसिंह के बेटे राम सिंह की छावनी के निकट सिद्धी फौलाद खां की निगरानी में नजरबंद करने का आदेश किया था. 16 मई, 1666 को शिवाजी महाराज को रदंदाज खां के मकान पर ले जाने का आदेश हुआ. राम सिंह की छावनी के निकट स्थित फिदाई हुसैन की शहर के बाहर टीले पर स्थित हवेली में शिवाजी को रखा गया. राम सिंह की हवेली कोठी मीना बाजार के नजदीक थी. यह जगह अभिलेखों में आज भी कटरा सवाई राजा जयसिंह के नाम से दर्ज है. राम सिंह की हवेली के निकट ही फिदाई हुसैन की हवेली थी, जो कोठी मीना बाजार ही है.
