इसरो का 640 टन वजनी बाहुबली रॉकेट काम कैसे करता है? लॉन्च के बाद के वो 974 सेकंड जो तय करते मिशन की कामयाबी

ISRO LVM3-M6 Mission Launch: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 24 दिसंबर को इतिहास रचने जा रहा है. भारत का सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3, जिसे पूरी दुनिया ‘बाहुबली’ के नाम से जानती है, अपनी अगली ऐतिहासिक उड़ान के लिए श्रीहरिकोटा के लॉन्च पैड पर तैयार खड़ा है. यह रॉकेट अमेरिकी कंपनी के ‘ब्लू बर्ड ब्लॉक-2’ सैटेलाइट को लेकर उड़ेगा. यह इसरो का अब तक का सबसे भारी और जटिल कमर्शियल मिशन है. 640 टन वजनी यह विशालकाय रॉकेट 6100 किलोग्राम के भारी-भरकम सैटेलाइट को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करेगा. यह मिशन न केवल इसरो की इंजीनियरिंग ताकत को दिखाएगा बल्कि ग्लोबल स्पेस मार्केट में भारत का कद कई गुना बढ़ा देगा. आइए जानते हैं कि ISRO का ‘बाहुबली’ रॉकेट LVM3 आखिर काम कैसे करता है.

इसरो का LVM3 रॉकेट कोई मामूली मशीन नहीं है. इसे भारत का ‘बाहुबली’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह सबसे ज्यादा वजन उठाने में सक्षम है. यह तीन स्टेज वाला एक हेवी लिफ्ट रॉकेट है. इसकी ऊंचाई 43.5 मीटर है. यानी यह किसी 14 मंजिला इमारत जितना ऊंचा है. इसका कुल वजन 640 टन है. जो सैकड़ों हाथियों के बराबर है. इसमें दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन मोटर्स (S200) लगी हैं. इसके बीच में एक लिक्विड कोर स्टेज (L110) है. और सबसे ऊपर क्रायोजेनिक अपर स्टेज (C25) है. यही वह ताकत है जो इसे दुनिया के सबसे भरोसेमंद रॉकेट्स में से एक बनाती है. इसी रॉकेट ने चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 को अंतरिक्ष में पहुंचाया था.

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