अमेरिका ने H-1B और H-4 वीजा आवेदकों के लिए सोशल मीडिया स्क्रीनिंग अनिवार्य कर दी है. 15 दिसंबर से प्राइवेट सोशल मीडिया अकाउंट भी पब्लिक करना होगा. डिजिटल गतिविधियों की जांच वीजा रिजेक्शन तक ले जा सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारतीय पेशेवरों की वीजा प्रक्रिया और धीमी होगी.
अमेरिका ने H-1B और H-4 वीजा प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है. 15 दिसंबर से सभी आवेदकों को सोशल मीडिया स्क्रीनिंग से गुजरना होगा. अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार देर रात यह जानकारी जारी की. अब वीजा इंटरव्यू से पहले H-1B वर्कर्स और उनके परिवार यानी H-4 डिपेंडेंट्स को अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘पब्लिक’ करने होंगे, ताकि अमेरिकी अधिकारी उनकी ऑनलाइन गतिविधियों की जांच कर सकें. इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि यह अमेरिका की डिजिटल फुटप्रिंट पॉलिसी का बड़ा विस्तार है. ग्लोबल इमिग्रेशन लॉ फर्म फ्रेगोमेन के वरिष्ठ काउंसलर मिच वेक्सलर के मुताबिक जून 2025 से F, M और J वीजा कैटेगरी में ये चेक लागू थे. अब H-1B और H-4 को जोड़ना इस नीति का पहला बड़ा विस्तार माना जा रहा है.
वेक्सलर ने कहा कि आवेदकों की पोस्ट, लाइक, इंटरैक्शन और संपूर्ण डिजिटल एक्टिविटी का गहन निरीक्षण होगा. स्टेट डिपार्टमेंट के अनुसार वीजा अधिकारी सोशल मीडिया प्रोफाइल, सार्वजनिक पोस्ट और ऑनलाइन डेटाबेस में उपलब्ध जानकारी की जांच करेंगे. विभाग ने याद दिलाया कि ‘हर वीजा एडज्यूडिकेशन एक नेशनल सिक्योरिटी डिसीजन होता है.’ और अमेरिकी वीजा अधिकार नहीं, बल्कि एक विशेषाधिकार है.कौन सी गलती वीजा फंसा सकती है?जून में जारी आंतरिक दिशा-निर्देशों में यह भी कहा गया था कि अगर किसी आवेदक ने सोशल मीडिया का कुछ हिस्सा प्राइवेट रखा है या उसके पास कोई ऑनलाइन उपस्थिति नहीं है, तो अधिकारी नकारात्मक निष्कर्ष निकाल सकते हैं. अधिकारी यह भी जांचेंगे कि कहीं किसी बयान में अमेरिका के नागरिकों, संस्थाओं या संस्कृति के प्रति वैमनस्य तो नहीं, किसी आतंकी समूह का समर्थन तो नहीं, या किसी अमेरिकी तकनीक का दुरुपयोग करने के संकेत तो नहीं हैं. ऐसा कोई भी कंटेंट फॉलो-अप इंटरव्यू, लंबे बैकग्राउंड चेक या वीजा रिजेक्शन का कारण बन सकता है.
