Supreme Court on Mahila Khatna: सुप्रीम कोर्ट ने दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित महिला खतना पर प्रतिबंध की याचिका पर केंद्र और कानून मंत्रालय से जवाब मांगा है. याचिका में कहा गया कि यह प्रथा बच्चों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है. WHO और संयुक्त राष्ट्र भी इसके खिलाफ हैं.
सुप्रीम कोर्ट कुछ मुस्लिमों, खासकर दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित महिला खतना पर (Female Genital Mutilation- FGM) प्रतिबंध लगाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है. कोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ-साथ कानून और न्याय मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. यह याचिका एनजीओ चेतना वेलफेयर सोसायटी की ओर से दायर की गई थी
20न कुरान में जिक्र, न इस्लाम का हिस्सा, फिर क्यों हो रहा महिलाओं का खतना? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाबWritten by:Saad OmarSupreme Court on Mahila Khatna: सुप्रीम कोर्ट ने दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित महिला खतना पर प्रतिबंध की याचिका पर केंद्र और कानून मंत्रालय से जवाब मांगा है. याचिका में कहा गया कि यह प्रथा बच्चों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है. WHO और संयुक्त राष्ट्र भी इसके खिलाफ हैं.ख़बरें फटाफटperfGogleBtn+ Follow usOn GoogleAdvertisementसुप्रीम कोर्ट कुछ मुस्लिमों, खासकर दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित महिला खतना पर (Female Genital Mutilation- FGM) प्रतिबंध लगाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है. कोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ-साथ कानून और न्याय मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. यह याचिका एनजीओ चेतना वेलफेयर सोसायटी की ओर से दायर की गई थी.क्यों हो रहा महिलाओं का खतना? सुप्रीम कोर्ट ने कानून मंत्रालय से मांगा जवाबदाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित महिला खतना पर प्रतिबंध की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा. (प्रतीकात्मक- News18)जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह मामला बच्चों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है और इसलिए इसे गंभीरता से देखा जाना चाहिए. याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशि किरण और अधिवक्ता साधना संधू ने दलील दी कि महिला खतना न तो इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा है और न ही किसी धार्मिक ग्रंथ में इसका स्पष्ट उल्लेख है. इसके बावजूद बच्चियों पर मजबूरन यह प्रक्रिया लागू की जाती है, जिससे उन्हें गंभीर शारीरिक और मानसिक नुकसान झेलना पड़ता है.महिलाओं पर खतने का बहुत बुरा प्रभावयाचिका में यह भी कहा गया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां और वैश्विक मानवाधिकार संगठन लगातार देशों से महिला खतना को रोकने, अपराध घोषित करने और समाप्त करने की अपील करते रहे हैं. मेडिकल शोध बताते हैं कि इस अत्याचार के चलते पीड़िताओं को अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के शारीरिक और मानसिक दुष्प्रभाव झेलने पड़ते हैं.
