उमस के बाद कैसे बदलता है मौसम, इसका साइबेरिया से क्या लेना-देना है

सितंबर में आखिरी हफ्ता चल रहा है. धूप तेज है. बाहर निकलते ही शरीर से पसीना निकलने लगता है. घर में रहो तो उमस और गर्मी से निजात नहीं है. पंखे की बजाए अब भी एसी ही सुकून दे रहा है. बरसात करीब करीब विदा हो चुकी है. सवाल उठता है कि ये उमस का चिपचिपा मौसम कब तक रहेगा. कब इससे निजात मिल पाएगी और ठंड दस्तक देगी.भारत में गर्मी का मौसम आमतौर पर अप्रैल में आता है, हालांकि अब मार्च से ही तपिश महसूस होने लगती है. फिर मई-जून तक तेज गर्मी होती है. जून के आखिर से मानसून के आने के साथ ही गरम उमस की चिपचिपाहट भी आ जाती है. पूरे बरसात के मौसम में बारिश के कारण उमस से कुछ सुकून तो मिलता है लेकिन धूप आते ही फिर उमस का खेल शुरू हो जाता है. सितंबर का महीना तो खत्म होने वाला है लेकिन उमस अभी मौजूद है. आखिर कब खत्म होगा ये मौसम.उमस का मौसम आमतौर पर तब खत्म होता है जब वातावरण में नमी या आर्द्रता में गिरावट आती है, जो अक्सर तेज बारिश, ठंडी हवाओं, या मौसमी बदलाव के कारण होता है. वातावरण में नमी तब घटती है जब तापमान गिरता है या जब तेज बारिश के बाद हवा अपेक्षाकृत सूखी हो जाती है. मानसून के जाने के बाद या ठंडी हवा के आने से भी नमी में कमी आती है, जिससे उमस महसूस नहीं होती.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!