H-1B वीजा फीस बढ़ोतरी: अमेरिकी इनोवेशन इकॉनमी पर खतरा! नैसकॉम ने जताई चिंता

नई दिल्ली. अमेरिका में H-1B वीजा फीस को सालाना 1 लाख डॉलर करने के फैसले ने उद्योग जगत को चौंका दिया है. नैसकॉम ने कहा कि यह कदम अमेरिका के इनोवेशन इकोसिस्टम और जॉब इकोनॉमी दोनों को प्रभावित कर सकता है. सबसे बड़ी दिक्कत फीस की रकम से ज्यादा इसे लागू करने की जल्दबाजी है. एक दिन की डेडलाइन ने कंपनियों, पेशेवरों और छात्रों के बीच गहरी अनिश्चितता पैदा कर दी हैभारतीय कंपनियों पर असरनैसकॉम के मुताबिक, इस फैसले का सीधा असर भारतीय पेशेवरों और उन कंपनियों पर होगा जो अमेरिका में ऑनशोर प्रोजेक्ट्स पर काम करती हैं. अतिरिक्त लागत और योजना में बदलाव से कारोबार प्रभावित हो सकता है. हालांकि, भारत की टेक कंपनियां पिछले कुछ वर्षों में लोकल हायरिंग पर जोर देकर H-1B वीजा पर अपनी निर्भरता पहले ही काफी कम कर चुकी हैं. इसके बावजूद यह नीतिगत बदलाव उनके लिए बड़ी चुनौती है.इनोवेशन और टेक्नोलॉजी पर खतरानैसकॉम ने स्पष्ट किया कि भारतीय कंपनियां हमेशा अमेरिका के कानून और नियमों का पालन करती रही हैं, प्रचलित वेतन देती हैं और स्थानीय स्टार्टअप्स व शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर इनोवेशन को आगे बढ़ाती हैं. H-1B वीजा धारक किसी भी तरह से अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं हैं. इसके उलट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य उभरती तकनीकों के युग में हाई-स्किल टैलेंट अमेरिका की प्रतिस्पर्धा और नेतृत्व को बनाए

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