H-1B Visa Fee Hike: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (19 सितंबर 2025) को H-1B वीजा के लिए 1,00,000 डॉलर सालाना फीस लागू की. इस खबर से भारतीय टेक प्रोफेशनल्स और आईटी इंडस्ट्री में हलचल मच गई. लेकिन यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी वीजा पॉलिसीज ने भारत को इनडायरेक्ट रूप से फायदा पहुंचाया हो. Y2K क्राइसिस, 2008 फाइनेंशियल क्राइसिस और ट्रंप के पहले टर्म (2017-20) में भी वीजा पर सख्ती ने भारत की IT इंडस्ट्री को बड़ा बढ़ावा दिया था. अब यह नई फीस एक और ‘रिवर्स ब्रेन ड्रेन’ (Reverse Brain Drain) ला सकती है, जिससे भारत के स्टार्टअप्स को बूस्ट मिलेगा.Y2K क्राइसिस – भारत की IT इंडस्ट्री का जन्म1990 के दशक के आखिर में Y2K बग का डर था कि साल 2000 आते ही कई कंप्यूटर सिस्टम क्रैश हो जाएंगे. अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियों को तुरंत सॉफ्टवेयर अपडेट करने के लिए सस्ते और कुशल प्रोग्रामर्स चाहिए थे, लेकिन वहां टैलेंट कम था. भारत के इंजीनियरिंग कॉलेजों से निकले और अंग्रेजी बोलने वाले प्रोग्रामर्स ने इस मौके को पकड़ा.
