नई दिल्ली. देश में महिलाएं किसी भी मामले में पीछे नहीं हैं. हवाई जहाज, फाइटर प्लेन से लेकर ट्रेन चलाने तक में महिलाएं आगे हैं. खास बात यह है कि एशिया की पहली महिला लोको पायलट भी इंडिया की हैं, जो करीब 37 साल पहले लोको पायलट बनी थीं, लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान में महिला लोको पायलट की बात जानकर हंस पड़ेंगे. यहां पर एक महिला लोको पायलट मुख्य ट्रेनों को नहीं चलती हैं, हाल ही में एक महिला मेट्रो ड्राइवर जरूर बनी हैं.मौजूदा समय भारतीय रेलवे में 1 लाख महिला कर्मचारी हैं, जो कुल वर्कफोर्स का लगभग 8.2 प्रतिशत हैं. इसके साथ ही महिनलाएं लोको पायलट, स्टेशन मास्टर, ट्रैकमैन, सिग्नल मेंटेनेंस गार्ड और गैंगमैन का काम बाखूबी कर रही हैं. भाारती रेलवे में पहली महिला लोको पायलट 1988 में सुरेखा यादव बनी थीं. वो आज सेमी हाई स्पीड ट्रेन यानी वंदेभारत चलाती हैं.
