नई दिल्ली. अगस्त के आंकड़ों में खुदरा महंगाई दर 2.07% दर्ज की गई है, जो पिछले महीने यानी जुलाई की 1.55% से कुछ ज्यादा है. महंगाई में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से सब्जियों, मांस और मछली, तेल और वसा, निजी देखभाल की वस्तुओं और अंडों की बढ़ी हुई कीमतों के कारण हुई है. फिर भी, खाद्य महंगाई लगातार तीसरे महीने नकारात्मक रही, जो -0.69% रही. यह जुलाई की तुलना में सुधार है, जब खाद्य कीमतों में और भी तेजी से गिरावट आई थी और यह -1.76% थी. ग्रामीण इलाकों में, समग्र मुद्रास्फीति एक महीने पहले के 1.18% से बढ़कर 1.69% हो गई. ग्रामीण इलाकों में खाद्य मुद्रास्फीति में भी कुछ सुधार हुआ, जो -1.74% से बढ़कर -0.70% हो गई.मामूली बढ़ोतरीयह बढ़त मामूली मानी जा रही है, लेकिन यह इशारा करती है कि उपभोक्ताओं के खर्च पर असर धीरे-धीरे बढ़ सकता है. हालांकि, अभी यह दर भारतीय रिजर्व बैंक के तय लक्ष्य 4 फीसदी से काफी नीचे है, जिससे फिलहाल गंभीर चिंता की स्थिति नहीं मानी जा रही.खाद्य पदार्थ और अन्य कारणमुद्रास्फीति में यह हल्की बढ़त मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों और जरूरी सामानों की कीमतों में हुई हलचल से जुड़ी मानी जा रही है. बरसात के मौसम में सब्जियों और अनाज की सप्लाई प्रभावित होने के चलते दामों में उतार-चढ़ाव देखा गया. वहीं, ऊर्जा और ईंधन की कीमतों ने भी खुदरा महंगाई को थोड़ा ऊपर खींचा. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आने वाले महीनों में सप्लाई चेन सामान्य हो गई तो दर फिर से स्थिर रह सकती है.
