तेजस इंजन, राफेल, Su-57… अब हीलाहवाली नहीं, 12 महीने में नहीं किया ये काम तो हजारों करोड़ का फटका लगना तय

Emergency Defence Contract: भारत अपने डिफेंस सिस्‍टम को अपग्रेड करने के लिए लगातार कदम उठा रहा है. फाइटर जेट के इंजन की खरीद से लेकर पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के न‍िर्माण से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए हैं. एयर डिफेंस सिस्‍टम को लेकर भी बड़ा निर्णय लिया गया है. देश को किसी भी हवाई हमले से पूरी तरह से सुरक्ष‍ित करने के लिए S-500 और गोल्‍डन डोम की तर्ज पर वायु सुरक्षा प्रणाली डेवलप करने का भी फैसला किया गया है. अब मोदी सरकार ने इमर्जेंसी रूट से डिफेंस परचेज से जुड़े प्रावधानों में बड़ा बदलाव किया है. इसके तहत रक्षा खरीद सौदों को न केवल रफ्तार मिलेगी, बल्कि सालों की देरी से भी बचा जा सकेगा. उम्‍मीद है कि इससे तेजस फाइटर जेट के लिए इंजन की आपूर्ति में भी तेजी आएगी. इसके अलावा अन्‍य आर्म्‍स और एम्‍यूनिशन की खरीद भी जल्‍द से जल्‍द संभव हो सकेगी. डिफेंस परचेज में यह बड़ा बदलाव हैदरअसल, मोदी सरकार ने इमर्जेंसी रूट से होने वाली रक्षा खरीद से जुड़े प्रावधानों में बड़ा बदलाव किया है. यह आर्म्‍स और अन्‍य डिफेंस परचेज को इमर्जेंसी विंडो से खरीदने वाले प्रोवीजन से जुडा है. बदले प्रवधान के तहत यदि कोई डिफेंस डली इस रूट से किया जाता है तो उसे 12 महीनों में अंजाम तक पहुंचाना आवश्‍यक है, नहीं तो कॉन्‍ट्रैक्‍ट कैंसिल हो जाएगा. रक्षा खरीद प्रणाली को और अधिक तेज और पारदर्शी बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. रक्षा सचिव ने एक कार्यक्रम के दौरान जानकारी दी कि रक्षा खरीद सायकल (procurement cycle) की समयसीमा में पहले ही 69 हफ्तों की कटौती की जा चुकी है. इससे रक्षा सौदों को समय पर पूरा करने की दिशा में अहम सुधार देखने को मिलेगा. रक्षा खरीद की लंबी प्रक्रिया में कई चरण शामिल होते हैं. विक्रेताओं से सूचना की मांग (Request for Information), सेवाओं की गुणवत्‍ता संबंधी आवश्‍यकताएं (SQRs) तय करना, डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल द्वारा आवश्‍यकता की स्‍वीकृति (Acceptance of Necessity) देना, निविदा (RFP) जारी करना, तकनीकी और मैदानी परीक्षण, और अंत में कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर बातचीत. इन सभी चरणों में लगने वाले समय को कम करने की दिशा में यह सुधार महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है.स्‍पेशल पैनलसरकार ने साथ ही यह भी ऐलान किया है कि डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर (DAP)-2020 को और सरल बनाने की प्रक्रिया जारी है. इसके लिए महानिदेशक (अधिग्रहण) की अध्यक्षता में एक पैनल का गठन किया गया है. यह पैनल रक्षा खरीद से जुड़े विभिन्‍न पहलुओं की समीक्षा कर रहा है, जिनमें कैटेगराइजेशन, Ease of Doing Business, ट्रायल प्रक्रिया का संचालन, कॉन्‍ट्रैक्‍ट के बाद का मैनेजमेंट, त्‍वरित प्रक्रियाएं (Fast Track Procedures) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों का समावेश शामिल है. विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा खरीद प्रक्रिया में यह सरलीकरण न केवल समय की बचत करेगा, बल्कि देश की रक्षा तैयारियों को भी मजबूत बनाएगा. सरकार का फोकस अब पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने पर है, ताकि आधुनिक तकनीकों और हथियार प्रणालियों की खरीद समयबद्ध ढंग से हो सके

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