AIIMS Develops Bioengineered Cornea: भारत में हर साल हजारों लोग कॉर्निया डैमेज (corneal damage) होने के कारण अंधे हो जाते हैं. कॉर्निया हमारी आंख की सबसे बाहरी परत होती है, जो लाइट को आंख में जाने और फोकस करने में मदद करती है. अगर किसी व्यक्ति की कॉर्निया डैमेज हो जाए, तो उसमें दूसरी कॉर्निया डाली जा सकती है, लेकिन भारत में डोनर कॉर्निया की भारी कमी है. देश में अंगदान करने वालों की संख्या बहुत कम है, जबकि इसकी जरूरत बहुत लोगों को है. डोनर कॉर्निया मिलने के लिए लोगों को सालों तक इंतजार करना पड़ता है. कई बार कॉर्निया ट्रांसप्लांट का मौका ही नहीं मिल पाता है.टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली AIIMS और IIT दिल्ली की एक टीम ने मिलकर बायोइंजीनियर्ड कॉर्निया (bioengineered cornea) डेवलप कर ली है, जिसका इंसानों पर क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो चुका है. अगर यह ट्रायल सफल होता है, तो भारत में कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए डोनर की निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है और हजारों लोगों की आंखों की रोशनी लौट सकती है. यह बायोइंजीनियर्ड कॉर्निया उन डोनेटेड कॉर्नियाज से बनाया गया है, जिन्हें अब तक अनफिट मानकर फेंक दिया जाता था. इस तकनीक से ऐसी कॉर्निया को भी उपयोगी बनाया जा सकता है, जिसमें लाइव सेल्स नहीं होतीं या जो इन्फेक्टेड होती हैं. इस तकनीक से कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए उपलब्ध सामग्री का दायरा बढ़ जाएगा.
