चीन का नया फ्लोटिंग आर्टिफिशियल आइलैंड सिर्फ वैज्ञानिक प्रोजेक्ट नहीं बल्कि दक्षिण चीन सागर में उसकी मोबाइल सैन्य मौजूदगी का नया हथियार माना जा रहा है. न्यूक्लियर-ब्लास्ट-रेजिस्टेंट बताए गए इस प्लेटफॉर्म से बीजिंग किसी भी विवादित जलक्षेत्र में दबदबा बढ़ा सकता है. यह प्रोजेक्ट साल 2028 में पूरा होगा. यही वजह है कि वियतनाम समेत पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में चिंता तेज हो गई है
दिल्ली. दुनिया के मानचित्र पर एक ऐसा सैन्य ढांचा उभर रहा है जो समुद्र की लहरों पर नहीं बल्कि चीन की आक्रामक रणनीति पर तैर रहा है. इसे बीजिंग “फ्लोटिंग आर्टिफिशियल आइलैंड” कहता है. यह एक ऐसा विशाल स्टील-आर्मर वाला प्लेटफॉर्म है जिसके न्यूक्लियर ब्लास्ट-रेजिस्टेंट होने का दावा किया जा रहा है. यानी यह परंपरागत युद्ध ही नहीं परमाणु हमले का झटका भी झेल सकता है. चीन ने समुद्र में 78000 टन वजन का बेहद रहस्यमय स्ट्रक्चर बनाना शुरू किया है. इसे 4 महीने तक 238 लोग रहने के लिए तैयार किया जाएगा.
