Jhalkari Bai Jayanti: झलकारी बाई 1857 की लड़ाई की वो वीरांगना थीं, जिन्होंने रानी लक्ष्मीबाई का रूप लेकर अंग्रेजों को भ्रमित किया और रानी को सुरक्षित निकलने का मौका दिया. बचपन से ही वे घुड़सवारी और हथियार चलाने में माहिर थीं. वह आगे चलकर दुर्गा दल की सेनापति बनीं और झांसी की रक्षा में अहम भूमिका निभाई.
नई दिल्ली: 22 नवंबर का दिन भारत की उस वीरांगना को याद करने का है, जिसने रण में उतरकर अंग्रेजों की पूरी स्ट्रैटेजी उलट दी. झलकारी बाई का नाम सुनते ही झांसी की गूंज उठती है. वो सिर्फ एक सैनिक नहीं थी. वो रानी लक्ष्मीबाई की परछाई थी. जब अंग्रेजों ने झांसी को घेरा तो उन्होंने गजब किया. झलकारी बाई ने रानी का वेश बनाया और दुश्मनों को चकमा दिया. उनकी शक्ल रानी से इतनी मिलती थी कि अंग्रेज भी धोखा खा गए. इसी वजह से रानी सुरक्षित निकल पाई थी. एक दलित परिवार में जन्मी इस बेटी ने कमाल कर दिया. अंग्रेजों के जनरल ह्यू रोज के पसीने छूट गए थे. उनकी बहादुरी की मिसाल आज भी बुंदेलखंड में दी जाती है. आइए जानते हैं इस महान वीरांगना की पूरी कहानी.
