OPERATION SINDOOR: AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब एक ऐसा हथियार बनकर उभरा है, जिसने पारंपरिक युद्ध के तरीकों को ही बदल दिया है. भारतीय सेना ने “ऑपरेशन सिंदूर” में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर AI का इस्तेमाल किया. भारतीय सेना द्वारा 23 स्वदेशी एप्लिकेशन विकसित किए गए, जिनके माध्यम से सटीक हमलों को अंजाम दिया गया और पाकिस्तानी पलटवार को सीमित कर दिया गया. पूर्व DG (इंफो ऑपरेशंस) और मौजूदा DG EME लेफ्टिनेंट जनरल राजीव कुमार सहानी ने इसका खुलासा किया. उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान डेटा और इनपुट के प्रबंधन के लिए 23 से ज्यादा एप्लिकेशन का उपयोग किया गया था. कमांडरों को एक इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल पिक्चर मिल रही थी, जिसमें डेटा फ्यूज़न और AI का उपयोग शामिल था. इन ऐप्स के विशिष्ट उपयोग थे, और उन्हें कमांडरों तथा अन्य सैन्य अधिकारियों ने अपनी भूमिकाओं के अनुसार प्रयोग में लिया.स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सिस्टमयह प्रणाली पूरी तरह से स्वदेशी रूप से विकसित एप्लिकेशन है, जिसका उपयोग सभी भारतीय खुफिया एजेंसियां करती हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस सिस्टम को बहुत कम समय में एजेंसियों की आवश्यकताओं के अनुसार मॉडिफाई किया गया. इसकी मदद से दुश्मन के सेंसर की पहचान करना संभव हुआ. ले. जनरल सहानी ने बताया कि सामान्यत: पाकिस्तान ने पूरे सीमा क्षेत्र में रडार, वेपन लोकेटिंग रडार, एयर डिफेंस रडार, और सर्फेस-टू-एयर मिसाइल बैटरियाँ तैनात की हुई थीं. भारतीय सेना के सेंसर लगातार इनकी जानकारी एकत्र कर रहे थे, जिसे एक्सेल शीट में दर्ज किया जाता था. दो वर्षों के डेटा को एकत्र कर, उसे एप्लिकेशन में इंटीग्रेट किया गया, जिससे उपकरणों की फ्रीक्वेंसी, लोकेशन, और मूवमेंट तक की जानकारी मिल गई. अब सेना जानती थी कि कौन-सा पाकिस्तानी उपकरण कहाँ है, और कब मूव हुआ. इससे भारतीय सेना को अपनी तैनाती की योजना बनाने में बहुत मदद मिली.सटीक निशाना साधने की क्षमता (Precision Targeting)लंबी दूरी के हथियारों के लिए मौसम की AI आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली का उपयोग किया गया, जिससे दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले किए जा सके.
