वाशिंगटन/वारसॉ: रूस से जंग की सूरत बनती देख यूरोप में हथियारबंदी तेज हो गई है. अमेरिका ने पोलैंड को FGM-148F Javelin एंटी-टैंक मिसाइलें बेचने की हरी झंडी दे दी है. यह सौदा लगभग 780 मिलियन डॉलर का है और इसे नाटो की पूर्वी दीवार को और मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है. पोलैंड ने अमेरिका से 2,506 जैवलिन मिसाइलें और 253 Javelin Lightweight Command Launch Units (CLU) मांगे हैं. इसके अलावा मिसाइल सिमुलेशन राउंड्स, बैटरी कूलेंट यूनिट्स, टूल किट्स, स्पेयर सपोर्ट, ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक मदद और ट्रांसपोर्टेशन भी पैकेज में शामिल है. डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने बयान में कहा कि यह डील अमेरिकी विदेश नीति और नेशनल सिक्योरिटी के लिहाज से अहम है क्योंकि इससे नाटो एलायंस मजबूत होगा और यूरोप में राजनीतिक व आर्थिक स्थिरता बढ़ेगी.रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पोलैंड ने अपनी सुरक्षा नीति को पूरी तरह बदल दिया है. वह अब सिर्फ नाटो पर निर्भर नहीं रहना चाहता बल्कि अपने बल पर रूस को रोकने की तैयारी कर रहा है. वारसॉ लगातार अमेरिका से पैट्रियट डिफेंस सिस्टम, HIMARS रॉकेट और अब जैवलिन जैसी मिसाइलें खरीद रहा है.पोलैंड की कोशिश है कि अगर रूस बाल्टिक देशों या उसके इलाके में किसी तरह की आक्रामकता दिखाए तो उसके पास तुरंत जवाबी कार्रवाई करने का दम हो. पोलैंड के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि जैवलिन जैसे हथियार उसकी स्वयंभू रक्षा क्षमता को मजबूत करेंगे और नाटो के सामूहिक मिशनों में भी उसे और सक्षम बनाएंगे.अमेरिका इस डील को सिर्फ हथियारों का सौदा नहीं, बल्कि रणनीतिक निवेश मान रहा है. इससे रूस पर दबाव बढ़ेगा और पुतिन को साफ संदेश जाएगा कि नाटो का पूर्वी फ्लैंक हर हाल में सुरक्षित रहेगा. इस सौदे से अमेरिकी डिफेंस कंपनियां RTX और लॉकहीड मार्टिन भी बड़ा फायदा कमाएंगी.
