नई दिल्ली. भारतीय बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने शुक्रवार को हुई बोर्ड मीटिंग में मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं. बड़े आकार के आईपीओ लाने वाली कंपनियों के लिए अब शेयर बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अधिक समय और नए मानक तय किए गए हैं.सेबी ने ₹50,000 करोड़ तक के मार्केट कैप वाली कंपनियों के लिए कोई बदलाव नहीं किया है. ऐसी कंपनियों को पहले की तरह लिस्टिंग के तीन साल के भीतर 25 फीसदी सार्वजनिक हिस्सेदारी हासिल करनी होगी. वहीं, ₹1 लाख करोड़ तक के मार्केट कैप वाली कंपनियों को अब 25 फीसदी शेयरहोल्डिंग लक्ष्य हासिल करने के लिए तीन की जगह पांच साल का समय मिलेगा.बड़ी कंपनियों के लिए नए प्रावधान1 लाख करोड़ रुपये से 5 लाख करोड़ रुपये तक के मार्केट कैप वाली कंपनियों के लिए सेबी ने नियमों में लचीलापन दिया है. इन्हें न्यूनतम पब्लिक ऑफर 6,250 करोड़ रुपये या पोस्ट-इश्यू मार्केट कैप का 2.75 फीसदी रखना होगा. वहीं, जिन कंपनियों का मार्केट कैप 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, उन्हें न्यूनतम पब्लिक ऑफर 15,000 करोड़ रुपये या 1 फीसदी रखना अनिवार्य होगा. इससे बड़े स्तर की कंपनियों को बाजार से पूंजी जुटाने में आसानी होगी.
