जम्मू-कश्मीर में पिछले चार दिनों से हो रही लगातार मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है. राज्य के कई जिलों में बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. बादल फटने और उसके बाद आई बाढ़ से अब तक 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हुए हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आपदा पर शोक जताया है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट में कहा, ‘श्री माता वैष्णो देवी मंदिर मार्ग पर हुए भूस्खलन के कारण हुई जनहानि दुखद है. मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं. ईश्वर करे कि घायल जल्द से जल्द स्वस्थ हों. प्रशासन सभी प्रभावित लोगों की सहायता कर रहा है. मैं सभी की सुरक्षा और कुशलक्षेम के लिए प्रार्थना करता हूं.’
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी हालात पर अपडेट देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. उन्होंने बताया कि तवी नदी का जलस्तर घटा है, लेकिन चिनाब नदी अब भी खतरे के निशान के करीब है. फिलहाल प्राथमिकता बिजली, पानी और मोबाइल सेवाओं की बहाली है.गृह मंत्रालय के निर्देश पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और वायुसेना की टीमें लगातार राहत-बचाव कार्य में जुटी हैं. एनडीआरएफ की 17 टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात हैं. इनमें से जम्मू में 9, किश्तवाड़ में 3, सांबा में 3 जबकि श्रीनगर, उधमपुर और रियासी एक टीम तैनात की गई हैं.
इस बीच बचाव सामग्री लेकर वायुसेना का C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट गाजियाबाद के हिंडन एयरफोर्स स्टेशन से जम्मू पहुंचा. वहीं चिनूक और Mi-17 V5 हेलिकॉप्टर भी जम्मू, उधमपुर, श्रीनगर और पठानकोट एयरबेस पर तैनाती के लिए तैयार रखे गए हैं.
ट्रेन सेवाओं पर असर
लगातार बारिश और बाढ़ के कारण 22 ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं, जबकि 27 ट्रेनों को बीच रास्ते से लौटाया गया. हालांकि बुधवार को हालात कुछ संभलने पर छह ट्रेनों को रवाना किया गया, जिनमें जम्मू तवी-कमाख्या एक्सप्रेस और जम्मू-बांद्रा ट्रेन भी शामिल हैं.
बाढ़-बारिश से कितना नुकसान
जम्मू शहर में मात्र 38 घंटे में 380 मिमी से अधिक बारिश दर्ज हुई है, जो दशकों में सबसे ज्यादा बताई जा रही है. इस बारिश ने कई पुल और सड़कों को नुकसान पहुंचाया है. ऐतिहासिक माधोपुर पुल भी क्षतिग्रस्त हुआ है, जिस पर बुधवार सुबह से यातायात बंद कर दिया गया.
लोगों ने बताई आंखों देखी
26 अगस्त को माता वैष्णो देवी मंदिर मार्ग पर अर्द्धकुंवारी के निकट इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास हुए भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई. हादसे में 9 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 21 से ज्यादा लोग घायल हुए. हादसे के दौरान यात्रा मार्ग पर अफरा-तफरी मच गई. कई श्रद्धालुओं ने इसे बादल फटने जैसी भयावह स्थिति बताया.
पटना से आए एक श्रद्धालु ने बताया कि ‘भूस्खलन के समय हम करीब 50 मीटर पीछे थे, जिससे जान बच गई, लेकिन हमारे दो साथी लापता हैं. स्थिति इतनी डरावनी थी कि चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार सुनाई दे रही थी.’
दिल्ली से आई नैना नामक श्रद्धालु ने कहा, ’26 अगस्त से लगातार भारी बारिश हो रही है. यात्रा पूरी तरह रोक दी गई है. तीर्थयात्रियों को चार किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया. यह प्रशासन का सही फैसला है क्योंकि सुरक्षा सबसे जरूरी है.’
इस बीच अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे बिना घबराए प्रशासन का सहयोग करें, अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें.
