आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच शुक्रवार को अमेरिका में शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया गया. इस समझौते से दोनों देश खुश हैं. भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भी इस समझौते की तारीफ की है. लेकिन एक देश ऐसा है जो इससे पूरी तरह नाराज दिख रहा है. इस देश का नाम ईरान है. ईरान की सीमा अजरबैजान और आर्मेनिया दोनों से लगती है. ईरान ने इस शांति समझौते के महत्वपूर्ण हिस्से ‘ट्रंप रूट फॉर इंटरनेशनल पीस एंड प्रॉस्पेरिटी’ को सिरे से खारिज कर दिया है. शुक्रवार को व्हाइट हाउस से ऐलान हुए इस कॉरिडोर का मकसद दशकों पुरानी दुश्मनी खत्म कर दोनों देशों को जोड़ना है. यह रास्ता अजरबैजान को उसके नखिचेवन एक्सक्लेव से जोड़ेगा, जो ईरान की सीमा के बेहद पास से गुजरेगा, और अमेरिका को इसे बनाने का विशेष अधिकार मिलेगा.आर्मेनिया-अजरबैजान में समझौताअजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान ने शुक्रवार को हाथ मिलाया, और इस ऐतिहासिक लम्हे के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मौजूद थे. जैसे ही दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया, ट्रंप ने मुस्कुराते हुए उनके हाथ थाम लिए. दक्षिण काकेशस के इन पड़ोसी देशों ने एक-दूसरे और अमेरिका के साथ कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनसे प्रमुख परिवहन मार्ग फिर से खुलेंगे और अमेरिका को इस क्षेत्र में रूस के घटते प्रभाव का फायदा मिलेगा.व्हाइट हाउस के अनुसार, समझौते में एक प्रमुख पारगमन गलियारे के निर्माण पर सहमति बनी है, जिसे अंतरराष्ट्रीय शांति और समृद्धि के प्रतीक के रूप में ‘ट्रंप रूट’ नाम दिया गया है. इस मौके पर ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा, ‘यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है, लेकिन मैंने इसके लिए नहीं कहा था.’ ट्रंप चाहते हैं कि उन्हें शांतिदूत के रूप में पहचाना जाए और उन्होंने यह भी नहीं छिपाया है कि उनकी नजर नोबेल शांति पुरस्कार पर है. आर्मेनिया और अजरबैजान, दोनों नेताओं ने इस सफलता का श्रेय ट्रंप और उनकी टीम को दिया.
