वडोदरा: लॉ स्टूडेंट रक्षित चौरसिया (23) ने पिछले हफ्ते हुए एक सड़क हादसे में आठ लोगों को अपनी कार से टक्कर मारी थी जिसमें एक महिला की मौत हो गई थी. इस मामले में पुलिस रिमांड के दौरान रक्षित चौरसिया ने अपनी कानूनी समझ का उपयोग किया और सवालों से बचने में कामयाब रहा.एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि उसने कानून की पढ़ाई की है, इसलिए उसे पता था कि कौन-से बयान उसे परेशानी में डाल सकते हैं. उसे जांच एजेंसी की सीमाओं का भी ज्ञान था और वह यह समझता था कि कैसे कुछ सवालों से बचा जा सकता है. पूछताछ के दौरान वह अधिकतर शांत रहा और ऐसे जवाब देने से बचता रहा, जिससे वह फंस सकता था.निकिता वाले सवाल पर क्या बोला रक्षित चौरसिया?हालांकि, चौरसिया को यह भी पता था कि कुछ सवालों पर पूरी तरह से चुप रहना उसे और संदेह के घेरे में डाल सकता है. इसलिए उसने केवल कुछ सवालों के जवाब दिए. उसने पुलिस के साथ ज्यादा सहयोग नहीं किया और उस (निकिता) लड़की के बारे में भी कुछ नहीं बताया, जिसका नाम उसने हादसे के बाद लिया था. पुलिस ने यह भी कहा कि चौरसिया के कार पर नियंत्रण खोने के दावे और क्राइम सीन पर कान पकड़कर माफी मांगने की उसकी हरकत भी एक रणनीति का हिस्सा लगती है.अब क्या करेंगी पुलिस?अब पुलिस उसके कॉल रिकॉर्ड की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि हादसे से कुछ दिन पहले वह किन लोगों के संपर्क में था. केस की जांच करने वाले अधिकारियों को उम्मीद है कि उन्हें उससे कोई जानकारी जरूर मिलेगी. एमएस यूनिवर्सिटी के लॉ स्टूडेंट चौरसिया पर आरोप है कि उसने 12 मार्च की रात वडोदरा के करेरीबाग इलाके में लापरवाही से गाड़ी चलाते हुए 8 लोगों को टक्कर मार दी थी. इस हादसे में एक महिला की मौत हो गई और 7 अन्य घायल हो गए थे.हादसे के वक्त चौरसिया के साथ उसका दोस्त प्रांशु चौहान भी कार में मौजूद था. पुलिस ने कहा कि हम फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि हादसे के समय चौरसिया और चौहान ने शराब या ड्रग्स का सेवन किया था या नहीं. सोमवार को अदालत ने चौरसिया को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.
