इस ‘अग्निवीर’ ने तो गजब कर दिया, 17 दिन में 1100 किमी दौड़कर पहुंचा महाकुंभ, आस्था और आत्मबल की बने मिसाल

Reported by.Ragini Rajbhar Edited by: RAGINI Rajbhar Updated:February 15, 2025,

MahaKumbh Inspiring Story: जहां आस्था होती है, वहां आत्मबल के आसरे हर बाधा को पार कर लेता है. ऐसा ही कुछ कर दिखाया बिहार के सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड के रामनगर कौशलीपट्टी निवासी रूपेश धावक ने. अग्निवीर चयनित युवा रूपेश ने 1100 किमी की दूरी केवल दौड़कर पूरी की और प्रयागराज के संगम में स्नान कर महाकुंभ की अपनी आस्था को चरम पर पहुंचाया.
इस ‘अग्निवीर’ ने तो गजब कर दिया, 17 दिन में 1100 किमी दौड़कर पहुंचा महाकुंभ, आस्था और आत्मबल की बने मिसालReported by:अमित कुमार झाEdited by:Vijay jhaAgency:News18 BiharLast Updated:February 15, 2025, 07:01 ISTMaha Kumbh Inspiring Story: जहां आस्था होती है, वहां आत्मबल के आसरे हर बाधा को पार कर लेता है. ऐसा ही कुछ कर दिखाया बिहार के सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड के रामनगर कौशलीपट्टी निवासी रूपेश धावक ने. अग्निवीर चयनित युवा रूपेश ने 1100 किमी की दूरी केवल दौड़कर पूरी की और प्रयागराज के संगम में स्नान कर महाकुंभ की अपनी आस्था को चरम पर पहुंचाया.Follow us on Google NewsADVERTISEMENTइस ‘अग्निवीर’ ने तो गजब कर दिया, 17 दिन में 1100 किमी दौड़कर पहुंचा महाकुंभमहाकुंभ में स्नान के लिए 17 दिन में 1100 किलोमीटर दौड़ गया रूपेश कुमार.हाइलाइट्सअग्निवीर चयनित रूपेश ने महाकुंभ में रच दिया इतिहास.धावक ने 1100 किलोमीटर दौड़कर पूरी की महाकुंभ यात्रा..आस्था, आत्मबल, संघर्ष और समर्पण का बन गए उदाहरण.सुपौल. एक सफर केवल एक शारीरिक चुनौती नहीं, बल्कि आत्मबल, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बन गया. बीते 23 जनवरी को सहरसा से शुरू हुई यह यात्रा 17 दिनों में पूरी हुई. रोजाना 10 घंटे दौड़ते हुए रूपेश ने अपनी मंजिल पाई और 8 फरवरी को दोपहर 12 बजे संगम में स्नान किया. यात्रा के दौरान उन्होंने दिन में करीब 10 घंटे दौड़ लगाई. रास्ते में कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उनका आत्मबल अडिग रहा. 1 फरवरी को दानापुर में उनकी तबीयत खराब हो गई, वहीं उनका पर्स और मोबाइल भी चोरी हो गया. इसके बावजूद, दोस्तों और स्थानीय लोगों की मदद से उन्होंने अपनी यात्रा जारी रखी. QR कोड के माध्यम से 5-6 हजार रुपये का आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ.300 रुपये और दृढ़ निश्चय के सहारे शुरू की यात्रा- बता दें कि रूपेश ने महाकुंभ तक की यह अनोखी यात्रा मात्र 300 रुपये लेकर शुरू की. इस राशि से उन्होंने अपनी यात्रा का पोस्टर तैयार कराया, जिसमें QR कोड के जरिए आर्थिक सहयोग की अपील की गई थी. सोशल मीडिया पर उन्होंने अपनी यात्रा साझा की, जिससे कई लोगों ने आर्थिक मदद की.दोस्तों ने छोड़ा साथ, लेकिन रूपेश ने नहीं मानी हारइस यात्रा की शुरुआत में रूपेश के साथ दो दोस्त भी थे, लेकिन बख्तियारपुर पहुंचने से पहले ही वे थककर वापस लौट गए. इसके बाद, कठिन परिस्थितियों में भी रूपेश ने अकेले ही 1100 किमी की यात्रा पूरी की. उन्होंने न केवल अपनी आस्था को प्रमाणित किया, बल्कि अपने साहस और दृढ़ निश्चय से लोगों के दिलों को जीत लिया.

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