दिल्ली के व्यस्ततम चौराहों में शुमार आईटीओ चौक से रोजाना सुबह-शाम हजारों वाहन गुजरते हैं. हो सकता है कि आप यहां से रोजाना निकलते हों. पर आपको शायद नहीं पता होगा कि लाला रामचरण अग्रवाल और आईटीओ चौक का क्या संबंध है, कौन थे वे ?
नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली के व्यस्ततम चौराहों में शुमार आईटीओ चौक से रोजाना सुबह-शाम हजारों वाहन गुजरते हैं. पीक ऑवर यानी सुबह और शाम को जाम लगना आम बात है. हो सकता है कि आप यहां से रोजाना निकलते हों. पर आपको शायद नहीं पता होगा कि लाला रामचरण अग्रवाल और आईटीओ चौक का क्या संबंध है, कौन थे वे ? आइए जानते हैं.
आईअीओ चौराहे का नाम करीब 16 साल पहले बदला जा चुका है. भले ही चौराहे पर साइनबोर्ड पर असली नाम चमक रहा हो. पर ज्यादातर लोग इसे आईटीओ चौक के नाम से जानते हैं. दिल्ली के दिल में बसा यह चौराहा कभी पूर्वी दिल्ली को जोड़ने का इकलौता द्वार था. आज भी प्रतिदिन हजारों वाहन यहां से होकर गुजरते हैं.इस चौक के पास इनकम टैक्स ऑफिस है. इस वजह से इसे शार्ट में आईटीओ कहते हैं. लगे. साल 2009 में दिल्ली में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने इस चौराहे का नाम बदल दिया. इसे स्वतंत्रता सेनानी लाला रामचरण अग्रवाल के सम्मान में लाला रामचरण अग्रवाल चौक नाम दिया गया. तब से सरकारी कागजों में नक्शों में और दिल्ली पुलिस के सभी रिकॉर्ड में यही नाम दर्ज है.
