दोहा से मॉस्को, न्यूयॉर्क से नियाग्रा तक… एक हफ्ते में चार महाद्वीप लांघ गए जयशंकर! भारत के कूटनीतिक तूफान की इनसाइड स्टोरी

S Jaishankar News: पिछले हफ्ते विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दोहा, मॉस्को, न्यूयॉर्क, नियाग्रा और कनाडा तक लगातार हाई-लेवल मीटिंग्स कर भारत की कूटनीति को आक्रामक मोड पर ला दिया. G7 बैठक, सऊदी व बहरीन से वार्ता, कतर के अमीर से मुलाकात, रूस के लावरोव के साथ रणनीतिक बातचीत और अमेरिका में कॉन्सुल जनरल्स का रिव्यू… इन सबने भारत की वैश्विक सक्रियता को नई गति दी.

नई दिल्ली: भारत ने पिछले हफ्ते जिस रफ्तार से कूटनीतिक दबदबा दिखाया, वह हाल के सालों में शायद ही कभी देखने को मिला हो. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक ही सप्ताह में चार महाद्वीप चीरते हुए दोहा, न्यूयॉर्क, नियाग्रा, मॉस्को तक का तूफानी दौरा पूरा किया. यह इतना हाई-वोल्टेज डिप्लोमैटिक ओवरड्राइव है कि कई देशों की विदेश नीतियां इसकी स्पीड के सामने फीकी लगती दिखीं. पिछले सात दिनों में जयशंकर ने G7 फॉरेन मिनिस्टर्स मीटिंग में हिस्सा लिया. अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो से मुलाकात की. सऊदी विदेश मंत्री से बातचीत की और यह सिर्फ एक शुरुआत थी. न्यूयॉर्क में उन्होंने भारतीय वाणिज्य दूतों की बड़ी बैठक ली, बहरीन के विदेश मंत्री से बात की, दोहा में कतर के अमीर से मिले और मॉस्को में रशियन फॉरेन मिनिस्टर सर्गेई लावरोव के साथ लंबी चर्चा की. वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली में रूस के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख निकोलाई पत्रुशेव ने NSA अजीत डोभाल से मुलाकात की. यह सब दिसंबर में व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से पहले की तैयारी का हिस्सा है.

मॉस्को में जयशंकर ने साफ कहा कि भारत-रूस दोस्ती दशकों से ग्लोबल स्थिरता का आधार रही है. 23वीं वार्षिक शिखर बैठक की तैयारी, ऊर्जा, रक्षा, भू-राजनीति और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरण, हर मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई. यह संकेत है कि भारत वॉशिंगटन, रियाद और टोक्यो के साथ जुड़ते हुए भी मॉस्को को अपने रणनीतिक चक्र से बाहर नहीं होने देगा.

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