Ganesh Chaturthi 2025: उचिप्पिलैयार में 1400 साल से विराजमान हैं गणपति, चतुर्थी पूजा से असंभव कार्य होता है सफल, पढ़ें गणेश जी की रोचक कथा

विघ्नहर्ता श्री गणेश जी का 10 दिनों तक चलने वाला जन्मोत्सव गणेश चतुर्थी से प्रारंभ हो गया है. मुंबई सहित देशभर में गणेशोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है. देशभर के गणेश मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया है. पौराणिक कथा के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश जी की उत्पत्ति माता पार्वती के उबटन से हुआ था. माता पार्वती को एक पुत्र की इच्छा हुई तो उन्होंने अपने उबटन से एक बालक को बनाया और उसमें प्राण डाल दिए. वही बालक प्रथम पूज्य गणपति महाराज के नाम से जाने जाते हैं. गणेशोत्सव के अवसर पर आज हम आपको तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में स्थित उचिप्पिलैयार गणेश मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जहां पर गणपति 1400 सालों से विराजमान हैं. इनको तिरुचिरापल्ली का संरक्षक कहते हैं. कहा जाता है कि जो भी एक बार उचिप्पिलैयार गणेश जी के दर्शन करके कोई कार्य करता है, तो उसमें सफलता जरूर मिलती है, चाहे वो कितना भी कठिन क्यों न हो.273 फीट की ऊंचे रॉक फोर्ट पर है मंदिरउचिप्पिलैयार गणेश मंदिर तिरुचिरापल्ली में रॉक फोर्ट के शिखर पर स्थित है. बताया जाता है कि यह गणेश मंदिर 7वीं शताब्दी में बना था. यह मंदिर लगभग 273 फीट की ऊंचाई है. इस मंदिर में गणपति बप्पा के दर्शन करने के लिए 400 से अधिक सीढ़ियां चढ़कर आनी होती हैं. मंदिर से भक्तों को तिरुचिरापल्ली शहर और कावेरी तट के सुंदर दृश्य भी देखने को मिलते हैं.लोक मान्यताओं के अनुसार, प्रभु श्रीराम का अयोध्या में राज्याभिषेक संपन्न हो गया तो लंका के राजा विभीषण अपने राज्य वापस लौट रहे थे. उस समय उनके हाथ में रंगनाथ जी की एक सुंदर सी मूर्ति थी.यात्रा की वजह से वह काफी थक गए थे, तो वे कावेरी के तट पर कुछ क्षण आराम करने की सोची. वहां पर एक बालक था, विभीषण ने रंगनाथ जी की मूर्ति को उस बालक को दे दिया, ताकि वह उसे अपने हाथ में लिए रहे, तब तक वे आराम कर लेंगे.इसी बीच विभीषण को नींद आ गई. जब उन्होंने अपनी आंखें खोलीं, तो रंगनाथ जी की मूर्ति जमीन पर रखी हुई थी. वह मूर्ति वहीं पर स्थापित हो गई थी. यह देखकर विभीषण नाराज हो गए और उस बालक को खोजने लगे.उन्होंने देखा कि वह बालक एक बड़ी सी चट्टान के शिखर पर बैठा है. गुस्से में विभीषण उस बालक के पास गए और उस पर प्रहार किया तो एक चमत्कार हुआ. वह बालक मंगलमूर्ति गणेश के रूप में वहीं पर स्थापित हो गए, जो उचिप्पिलैयार गणेश के नाम से प्रसिद्ध हुए.गणेश चतुर्थी पर होता है 7 दिनों का उत्सवउचिप्पिलैयार गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी का उत्सव 7 दिनों तक चलता है. यहां के लोग धूमधाम से गणेश जी का जन्मदिन मनाते हैं. गणेश चतुर्थी के अवसर पर दूर-दूर से भक्त गणपति बप्पा के दर्शन करने आते हैं. इस मंदिर में गणेश पूजा के लिए पहले से बुकिंग करानी पड़ती है. यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो आप गणेश चतुर्थी की पूजा से वंचित हो सकते हैं.गणेश चतुर्थी पूजा से कठिन कार्य भी होते हैं सफललोक मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के अवसर पर जो भी इस मंदिर में गणपति बप्पा की पूजा करता है और उसके बाद जो भी कार्य करता है, वह सफल सिद्ध होता है, चाहे वह कितना भी कठिन क्यों न हो

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