लखनऊ. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में अलीगढ़ का नाम बदलकर हरिगढ़ करने की मांग उठाई. यह मांग ऐसे समय में आई है जब राज्य में पंचायत चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं. जानकारों का मानना है कि यह कदम भाजपा की ख़ास रणनीति का हिस्सा हो सकता है. दरअसल, बीजेपी राष्ट्रवाद और गुलामी के प्रतीकों को खत्म करने का मुद्दा उठाती रही है. इसके पीछे की सोच हिंदू वोट बैंक, खासकर ओबीसी मतदाताओं को एकजुट करना है. बीजेपी की यह रणनीति इसलिए भी अहम है क्योंकि समाजवादी पार्टी की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए ओबीसी वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिशों कर रही है.
कल्याण सिंह की पुण्यतिथि को ‘हिंदू गौरव दिवस’ के रूप में मनाते हुए डिप्टी सीएम मौर्य ने कहा कि अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ करने में अब देरी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने अयोध्या और प्रयागराज जैसे नाम बदलावों का हवाला दिया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पहले अलीगढ़ को हरिगढ़ कहकर संबोधित किया है. सोशल मीडिया पर इस घटना की खबरें तेजी से वायरल हो रही हैं, जहां कई यूजर्स इसे हिंदुत्व की जीत के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे इतिहास से छेड़छाड़ बता रहे हैं. यह मांग शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदलने के बाद आई है. 2017 में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद से सरकार ने कई जगहों के नाम बदले हैं, जैसे प्रयागराज, फैजाबाद, मुगलसराय स्टेशन और कई अन्य रेलवे स्टेशनों के.
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में अलीगढ़ का नाम बदलकर हरिगढ़ करने की मांग उठाई. यह मांग ऐसे समय में आई है जब राज्य में पंचायत चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं. जानकारों का मानना है कि यह कदम भाजपा की ख़ास रणनीति का हिस्सा हो सकता है. दरअसल, बीजेपी राष्ट्रवाद और गुलामी के प्रतीकों को खत्म करने का मुद्दा उठाती रही है. इसके पीछे की सोच हिंदू वोट बैंक, खासकर ओबीसी मतदाताओं को एकजुट करना है. बीजेपी की यह रणनीति इसलिए भी अहम है क्योंकि समाजवादी पार्टी की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए ओबीसी वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिशों कर रही है.
Xराजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस मांग के पीछे भाजपा की मंशा हिंदू वोटों को मजबूत करना है, खासकर ओबीसी तबके को, जो एसपी की पीडीए रणनीति से प्रभावित हो सकता है. कल्याण सिंह खुद ओबीसी समुदाय से थे और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे, इसलिए उनकी पुण्यतिथि पर यह मांग सांकेतिक है.
ऐतिहासिक संदर्भ और संभावित प्रभाव
अलीगढ़ का नाम बदलने की मांग पुरानी है, जो मुगल काल से जुड़े नामों को हटाने की भाजपा की नीति से जुड़ी है. योगी सरकार ने पहले भी ऐसे कदम उठाए हैं, जो हिंदुत्व एजेंडे को मजबूत करते हैं. ऐसे में हो सकता है कि सरकार जल्द ही नाम बदलने के फैसले पर अपनी मुहर लगा दे. हालांकि, यह कदम अल्पसंख्यक समुदायों में असंतोष पैदा कर सकता है.
