Supreme Court News Dog Case: दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्टके आदेश के खिलाफ जब डॉग लवर्स अदालत पहुंचे तो उन्होंने भावुक अपील की – “मीलॉर्ड, कुत्तों को मत हटाइए…”. लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी फेरते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से ही इनकार कर दिया.याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि एमसीडी (MCD) ने अधिसूचना तब जारी कर दी जब शीर्ष अदालत इस मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख चुकी थी. हालांकि, जज साहब ने तत्काल सुनवाई से मना कर दिया और इस तरह अपील करने वालों को सीधे जोड़ का झटका मिला.किस बेंच ने की सुनवाई?इस अपील पर जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने सुनवाई की. उन्होंने साफ कहा कि इस याचिका पर तत्काल सुनवाई नहीं होगी. नतीजा यह हुआ कि डॉग लवर्स को कोर्ट से कोई राहत नहीं मिल सकी.सुप्रीम कोर्ट का पिछला आदेश11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने दिल्ली-एनसीआर के अधिकारियों को निर्देश दिया था कि:सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए.उन्हें श्वान आश्रय स्थलों में रखा जाए.आठ सप्ताह के भीतर आश्रय स्थलों का निर्माण कर रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी जाए.क्यों लिया गया था संज्ञान?दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं और खासकर बच्चों में रेबीज के खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को स्वत: संज्ञान लिया था. इसके बाद 11 अगस्त को विस्तृत निर्देश जारी किए गए थे.अदालत की टिप्पणी14 अगस्त को तीन जजों जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा था कि “दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों की समस्या स्थानीय अधिकारियों की निष्क्रियता का नतीजा है.” अदालत ने उस दिन आदेश सुरक्षित रख लिया था.आगे क्या होगा?सुप्रीम कोर्ट के इनकार के बाद अब एमसीडी की अधिसूचना लागू रहेगी. यानी सड़कों, कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को उठाकर श्वान आश्रय स्थलों में रखा जाएगा.
