अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात को लेकर नई हलचल शुरू हो गई है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को भरोसा दिलाया है कि 22 अगस्त को वे एक त्रिपक्षीय बैठक कराने की कोशिश करेंगे, जिसमें पुतिन के साथ जेलेंस्की भी शामिल होंगे. खास बात यह है कि भारत पर 27 जुलाई से 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लागू होने वाला है और ऐसे समय में यह मीटिंग भारत के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है. एक्सपर्ट कह रहे कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन को भारत पर लगाया गया टैरिफ भी जरूर याद होगा, और इस बातचीत पर उसका भी असर पड़ने की पूरी संभावना हैट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ लगाते वक्त कहा था कि चूंकि भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं कर रहा है, इसलिए हम ये टैरिफ लगा रहे हैं. लेकिन पुतिन से मुलाकात के बाद उनके सुर नरम पड़ गए. उन्होंने खुद से दावा कर दिया कि भारत तेल खरीदना बंद कर चुका है. ऐसे में इस पर कोई फैसला लिया जा सकता है. एक्सपर्ट के मुताबिक, ट्रंप खुद भी चाहते हैं कि भारत के साथ रिश्ते ठीक हो जाएं.पीछे हटने का रास्ता बना लिया?कूटनीतिक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी ने पुतिन के साथ ट्रंप की मीटिंग के बाद एक्स पर लिखा, ट्रंप शायद रूस से ऊर्जा खरीद पर लगाए गए सेकेंडरी सैंक्शंस पर दोबारा विचार करें. क्योंकि चीन पर ऐसे दंडात्मक कदम बढ़ाने की संभावना पर उन्होंने कहा– “आज जो हुआ, उसके बाद मुझे लगता है कि अब इस पर सोचने की जरूरत नहीं है.” इसी तर्ज पर, भारत पर लगाए गए सेकेंडरी सैंक्शंस यानी 27 अगस्त से लागू होने वाले 25% अतिरिक्त टैरिफ भी टाले जा सकते हैं. ये टैरिफ असली नीति का हिस्सा कभी थे ही नहीं, बल्कि यह नई दिल्ली को अपनी शर्तों पर ट्रेड डील करने के लिए दबाव डालने का एक कच्चा ब्लैकमेलिंग टूल था. ट्रंप ने शायद अपने लिए पीछे हटने का रास्ता बना लिया है.
