नई दिल्ली. दुनिया भर में तेजी से बढ़ती गर्मी के कारण लोगों के शारीरिक स्वास्थ्य पर लगातार खराब असर पड़ता देखा जा रहा है. तेज गर्मी की चपेट में आने वाले लोग अक्सर कई तरह की बीमारियों के शिकार होते हैं. मगर अब एक नए रिसर्च में खुलासा हुआ है कि तेज गर्मी से लोगों को कई तरह की मानसिक बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ रहा है. ऑस्ट्रेलिया में किए गए एक रिसर्च से साफ पता चलता है कि जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन बिगड़ रहा है, मानसिक और व्यवहार संबंधी विकारों (एमबीडी) का बोझ भी बढ़ रहा है. अगर ऐसे ही गर्मी बढ़ती रही तो दुनिया में मानसिक तौर पर बीमार लोगों का आंकड़ा तेजी से बढ़ सकता है.क्या है एमबीडीएमबीडी में चिंता बढ़ना, अवसाद बढ़ना, विरोधी भावात्मक विचार, सिज़ोफ्रेनिया, शराब और नशीली दवाओं के उपयोग संबंधी विकार और अन्य मानसिक विकार सहित कई तरह के दूसरे मुद्दे शामिल हैं. हाल के अनुमानों के मुताबिक अगर गर्मी ऐसे ही बढ़ती रही तो 2030 के दशक में एमबीडी का बोझ मौजूदा वक्त की तुलना में 11 फीसदी और 2050 के दशक में 27.5 फीसदी तक बढ़ सकता है.युवाओं पर ज्यादा असरइस रिसर्च को करने वाले साइंटिस्टों का मानना है कि बढ़ती गर्मी के कारण सबसे ज्यादा असर युवाओं और बच्चों पर दिखाई दे सकता है. सिज़ोफ्रेनिया के लक्षण आमतौर पर युवाओं में दिखते हैं. बढ़ती गर्मी के कारण उसका प्रकोप और ज्यादा होने की आशंका जताई जा रही है. उनका मानना है कि अगर क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वॉर्मिंग को रोकने के कोई बड़े और कड़े उपाय नहीं किए गए तो बढ़ती गर्मी का लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर खराब असर तेजी से दुनिया के सामने आने लगेगा.15 साल के डेटा की स्टडीइस स्टडी में साइंटिस्टों ने 2003 और 2018 के बीच ऑस्ट्रेलिया के सभी राज्यों और क्षेत्रों के हेल्थ डेटा की जांच की है. ये डेटासेट दिखाता है कि एमडीएस से अस्पताल में भर्ती होने और आपातकालीन कक्ष में जाने वाले मरीजों की संख्या आम तौर पर तापमान बढ़ने की घटनाओं के साथ बढ़ जाती है. उदाहरण के लिए 2008 में एडिलेड में आई भीषण गर्मी के कारण बच्चों में एमडीएस से संबंधित अस्पताल में भर्ती होने की संख्या में 64 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी. जबकि 75 साल और उससे अधिक आयु के लोगों में एमडीएस से संबंधित अस्पताल में भर्ती होने की संख्या में महज 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी. ये हीटवेव 15 दिनों तक चली थी
